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दाबे खोखले खरगापुर नगर परिषद की लापरवाही से प्यासी पड़ी निशुल्क प्याऊ। राहगीरों कि सुध लेने वाला कोई नहीं कागजों भरपूर सप्लाई

*दावे खोखले: खरगापुर नगर परिषद की लापरवाही से ‘प्यासी’ पड़ी नि:शुल्क प्याऊ, राहगीरों की सुध लेने वाला कोई नहीं

*कागजों में दौड़ रही ‘जल सेवा’, हकीकत में हलक सूखे; प्याऊ से गायब हुआ पानी, राहगीर परेशान*

खरगापुर।। तपती धूप और झुलसाने वाली गर्मी के इस मौसम में आम राहगीरों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से नगर परिषद खरगापुर द्वारा शुरू की गई नि:शुल्क प्याऊ व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी है। परिषद के जिम्मेदारों ने वाहवाही लूटने के लिए मुख्य स्थानों पर प्याऊ तो स्थापित कर दी, लेकिन उनमें पानी की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना भूल गए। आलम यह है कि यह प्याऊ अब केवल कागजी दावों और सरकारी फाइलों में ही पूरी तरह ‘सफल’ नजर आ रही है, जबकि हकीकत में राहगीर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। नगर परिषद की इस घोर लापरवाही ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।

दिन में सिर्फ एक बार रस्म अदायगी, दोपहर में सूख रहे हलक

स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने परिषद की इस उदासीनता पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। मौके पर मौजूद राहगीरों ने बताया कि इस प्याऊ में पूरे दिन में केवल एक बार पानी भरा जाता है। सुबह एक बार पानी भरने के बाद दोबारा इसकी सुध लेने कोई नहीं आता। दोपहर के समय, जब सूर्यदेव के तीखे तेवरों के कारण राहगीरों को ठंडे पानी की सबसे ज्यादा दरकार होती है, तब यह प्याऊ पूरी तरह सूखी मिलती है। जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। *अव्यवस्था का जमीनी सच* : कागजी घोड़े: रिकॉर्ड में जनता को ठंडे पानी की सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर राहगीरों की तश्नगी (प्यास) बुझाने के लिए कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं हैं। *जिम्मेदारों की खामोशी:* बार-बार सामने आ रही दिक्कतों के बावजूद नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा तहाफ्फुज (सुरक्षा/जनहित) और जनता की बुनियादी जरूरतों को लेकर कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा रही है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि पूरी व्यवस्था में शफ्फाफियत (पारदर्शिता) लाई जाए और प्याऊ में नियमित रूप से पानी भरने के लिए किसी कर्मचारी की स्थायी ड्यूटी लगाई जाए।नगर परिषद की इस अनदेखी का सबसे सीधा और बुरा असर उन गरीब मजदूरों, किसानों और राहगीरों पर पड़ रहा है जो दूर-दराज के इलाकों से अपने रोजमर्रा के कामों के लिए नगर में आते हैं। जेब में पैसे न होने के कारण वे बाजार से बोतल बंद पानी खरीदने में असमर्थ हैं और प्याऊ के पास आकर उन्हें केवल मायूसी हाथ लग रही है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस अव्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया, तो इस भीषण गर्मी में राहगीरों की परेशानी और अधिक बढ़ सकती है।

*इनका कहना है:* “दिनभर में मुश्किल से केवल एक बार ही इस प्याऊ में पानी भरा जाता है। उसके बाद पूरे दिन यह खाली पड़ी रहती है। दोपहर की भीषण गर्मी में जब सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है, तब बूंद-बूंद के लिए भटकना पड़ता है। जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।”

— *स्थानीय राहगीर*

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